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Sanatan Dharam: क्या सचमुच शेषनाग के फनों पर टिका है ब्रह्मांड? जानिए सनातन धर्म की अद्भुत मान्यता

Sanatan Dharam: क्या सचमुच शेषनाग के फनों पर टिका है ब्रह्मांड? जानिए सनातन धर्म की अद्भुत मान्यता
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Sanatan Dharam: सनातन धर्म में ब्रह्मांड की कल्पना केवल भौतिक नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थों से जुड़ी हुई है। विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, यह सृष्टि किसी खाली अंतरिक्ष में नहीं तैर रही, बल्कि इसका आधार दिव्य शक्तियों पर टिका हुआ है। कहा जाता है कि पूरा ब्रह्मांड शेषनाग के फनों पर स्थित है, और वे स्वयं कूर्म अवतार के रूप में एक विशाल कछुए की पीठ पर टिके हैं।

यह सब अनंत क्षीर सागर में स्थित है, जहां भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन रहते हैं और उनकी नाभि से निकले कमल पर ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं। पुराणों के अनुसार, यह पूरी सृष्टि 14 लोकों में विभाजित है, जो ब्रह्मा जी के उसी दिव्य कमल की डंडी में बसे हुए माने जाते हैं।

ऊपर के 7 लोक (उच्च लोक)

सबसे पहले अगर ऊपर के लोकों को समझें, तो इन्हें ऊर्ध्व लोक कहा जाता है और ये चेतना के उच्च स्तर को दर्शाते हैं। सबसे ऊपर ब्रह्मलोक है, जहां से सृष्टि का संचालन होता है और इसे सर्वोच्च स्थान माना जाता है। इसके नीचे तपोलोक है, जहां महान ऋषि और देवता कठोर तपस्या में लीन रहते हैं। फिर जनलोक आता है, जहां सनक, सनंदन जैसे सनकादि ऋषि निवास करते हैं, जो जन्म से ही ज्ञानी माने जाते हैं। इसके बाद महर्लोक है, जहां महर्षि यज्ञ और ज्ञान में लीन रहते हैं।

स्वर्गलोक वह स्थान है जहां इंद्रदेव, अप्सराएं और दिव्य सुख-सुविधाएं मौजूद हैं। इसके नीचे भुवर्लोक है, जो ग्रह-नक्षत्रों और अंतरिक्षीय शक्तियों का क्षेत्र है, और अंत में पृथ्वीलोक आता है, जहां हम मनुष्य रहते हैं और जहां कर्म, धर्म और जीवन के निर्णयों का महत्व सबसे अधिक होता है।

नीचे के 7 लोक (पाताल लोक)

अब अगर नीचे के लोकों की बात करें, तो इन्हें अधोलोक कहा जाता है। ये भौतिक तथा गूढ़ शक्तियों से जुड़े हुए माने जाते हैं। पृथ्वी के नीचे सबसे पहले अतल लोक आता है, जिसे दानवों का क्षेत्र माना गया है। इसके बाद वितल लोक है, जहां शिव के गणों का निवास बताया गया है।

सुतल लोक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राजा बलि का राज्य है, जिन्हें वामन अवतार से आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। इसके बाद तलातल लोक आता है, जिसे मय दानव का क्षेत्र कहा गया है।

फिर महातल लोक है, जहां असंख्य नाग जातियां निवास करती हैं। इसके नीचे रसातल लोक है, जो असुरों का अंधकारमय क्षेत्र माना जाता है, और सबसे अंत में पाताल लोक आता है, जहां नागों और दैत्यों की गहरी और रहस्यमयी गुफाएं स्थित हैं।

लोकों का महत्व

इन सभी लोकों के नीचे अनेक नरक लोकों का भी वर्णन मिलता है, जहां जीवों को उनके कर्मों के अनुसार दंड मिलता है। इस पूरी संरचना को केवल भौतिक रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक व्यवस्था के रूप में समझा जाता है। जो यह दर्शाती है कि ब्रह्मांड कई स्तरों पर काम करता है।

हर लोक जीवन, चेतना और कर्म के अलग-अलग आयाम को प्रकट करता है। इस संपूर्ण संतुलन का आधार भगवान विष्णु माने जाते हैं, जबकि इसे स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने की जिम्मेदारी अनंत शेष निभाते हैं। मान्यता है कि जब तक शेषनाग अस्तित्व में हैं, तब तक यह सृष्टि भी कायम रहेगी।

Shweta Yadav
Author: Shweta Yadav

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