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Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा है आज, जानें किस मुहूर्त में आज रात रखें चांद की रोशनी में खीर

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हिंदू पंचांग के अनुसार आज शरद पूर्णिमा का शुभ पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन की चांदनी को अमृत तुल्य माना जाता है, इसलिए इस रात दूध और चावल से बनी खीर को चांद की रोशनी में रखने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस विशेष रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों संग महारास रचाया था। इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी रोशनी में दिव्यता और ऊर्जा मानी जाती है।

 

मां लक्ष्मी की पूजा और रात्रि जागरण

शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग जागरण करते हुए पूजा-पाठ में लीन रहते हैं, उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं। इसीलिए घरों में साफ-सफाई कर के पूजन स्थल को सजाया जाता है, दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और मां लक्ष्मी तथा चंद्र देव की आराधना की जाती है। भक्त पूरी रात भक्ति और भजन में डूबे रहते हैं।

खीर रखने का शुभ मुहूर्त

धार्मिक परंपरा के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात में बनाई गई खीर को चांदनी में खुले आंगन, छत या बालकनी में रखा जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 7 अक्टूबर की रात 9 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। खीर रखने का सर्वश्रेष्ठ समय 6 अक्टूबर की रात 10 बजे से 12:30 बजे के बीच माना गया है। खीर को हल्के कपड़े या जाली से ढक दिया जाता है ताकि चांद की ठंडी किरणें उस पर पूरी तरह से पड़ सकें और कीड़े-मकौड़ों से सुरक्षा भी बनी रहे।

Sharad Purnima 2025: आज आसमान से बरसेगा अमृत! जानें शरद पूर्णिमा के दिन खीर  रखने की खास परंपरा - sharad purnima 2025 date time significance kheer  tradition know all details | Moneycontrol Hindi

धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

शरद पूर्णिमा की रात को लेकर न सिर्फ धार्मिक, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी खास मान्यताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि इस रात की चांदनी में विशेष औषधीय गुण होते हैं जो शरीर को शीतलता और स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। आयुर्वेद में भी उल्लेख है कि इस रात चांद की रोशनी में रखी खीर पाचन में सुधार करती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और मानसिक शांति देती है।

प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है खीर

पूजा-पाठ और रातभर के जागरण के बाद अगली सुबह खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है और परिवार तथा पड़ोसियों में बांटा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस खीर को खाने से स्वास्थ्य, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।शरद पूर्णिमा की पावन रात में चंद्रमा की शीतल और दिव्य किरणों में रखी खीर केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष लोग इस रात का बेसब्री से इंतजार करते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा और खीर रखने की रस्म को निभाते हैं।

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